चक्रवात मोन्था के प्रभाब से भारी बारिस, किसानों की चिंताएँ

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केंद्रापरा 28/10 –  बंगाल की खाड़ी में बना एक भीषण चक्रवाती तूफान (मोंथा) । इसने मंगलवार रात लगभग 7 से10 बजे  का अंदर आंध्र प्रदेश के तट पर काकीनाडा के पास दस्तक दी। इसके प्रभाव से, मंगलवार सुबह से केंन्द्रापड़ा ज़िले में शुरू हुई बारिश के बाद से ही किसान दहशत में हैं। किसानों का कहना है कि अगर भारी बारिश हुई तो धान, सब्ज़ी और अन्य फ़सलें पूरी तरह से बर्बाद हो जाएँगी।

किसान नेता दशरथी साहू का कहना है कि पट्टामुंन्डाई तालुक में लगभग ढाई हजार हेक्टेर भूमि पर सब्जी के  खेती होती है, जबकि 11000 हेक्टेयर भूमि पर खरीफ़ धान की खेती होती है। ज़्यादातर धान के पौधों से धान निकल रही हैं, जबकि कुछ धान के खेतों में  फूल आ रहे हैं। कुछ खेतों में धान पकती हुई दिखाई दे रही हैं। चक्रवात के प्रभाव से भारी बारिश और तेज़ हवाएँ चल रही हैं। इससे फलियाँ नष्ट होनेका संबबना  हैं और धान के फूल उड़ रहे हैं। किसानों ने कृषक सेवा सहकारी समिति, विभिन्न बैंकों से कर्ज और ऋण लेकर धान की खेती की है। यदि प्राकृतिक आपदा और बारिश और हवा आती है, तो किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि वे अपने फसल के लिए गए ऋण को कैसे चुकाएंगे। कुछ स्थानों पर, किसान जल्दी में आधे पके धान को काटकर लेते हुए दिखाई देते हैं।

किसान सुरेंद्र परिदा का कहना है कि किसान अब चिंतित हैं। वे कुछ दिनों के बाद धान की कटाई करनेका तयारिमेय था। जब धान की फलियाँ पक जातीं, तो किसान धान को काटकर ले जाते। हालांकि, चक्रवात के प्रभाव के कारण बारिश हो रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

 

किसान पूर्णचंद्र नायक कहा  है कि पट्टामुंडई धोया आंचल में अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर हैं इस साल चार बार बाढ़ के कारण खेती-किसानी प्रभावित हुई है। बाढ़ के बाद किसानों ने बड़ी उम्मीद से धान की ख्याति की थी। लेकिन कई बार भारी बारिश हुई। लेकिन नदी किनारे की कृषि भूमि होने के कारण पानी निकल गया और धान उगलाई । चक्रवात की पूर्व चेतावनी के बाद, कुछ किसानों ने धान की कटाई कर ली , और अधिकांश किसानों ने धान की कटाई नहीं की थी क्योंकि यह कटाई के लिए उपयुक्त नहीं थे। लेकिन चक्रवात के प्रभाव के कारण मंगलवार को बारिश हो रही है। पके हुए धान के पौधे बारिश के पानी में डूबे हुए हैं। परिणामस्वरूप, धान के डंठल अंकुरित होने की उम्मीद है।

नरेंद्र धल, हिमांशु वाष्वाल का कहना है कि बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे किसानों के संकट के समय कृषि विभाग गहरी नींद सो रहा है। कृषि विभाग किसानों और फसलों की सुरक्षा के लिए कोई सलाह देना उचित नहीं समझता। कुछ दिन पहले भारी बारिश के कारण सब्जियों को काफी नुकसान हुआ था। जिसके कारण अब सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं।

उपदा क्षेत्र के किसान विजय नायक बताते हैं कि उन्होंने लगभग 22 एकड़ ज़मीन में धान की खेती की है। लेकिन चक्रवात मोंठ के असर से हवा की गति बढ़ रही है और बारिश हो रही है। तेज़ हवा में फूल वाले धान के नष्ट होने की आशंका है। जब मैंने इस बारे में प्रखंड कृषि पदाधिकारी शरत नायक से पूछा तो उन्होंने बताया कि हमें उम्मीद थी कि इस साल धान की खेती अच्छी होगी, इसलिए हम ज़्यादा पैदावार की उम्मीद कर रहे थे। अभी फूल वाले धान की फ़सल उड़ाने का समय है। लेकिन अगर बारिश हुई, तो समस्या खड़ी हो जाएगी।

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