
भुवनेश्वर 24/11-केंद्रापदा जिला पट्टामुंडाई शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों में एकाधिक त्योहारों के दौरान डीजे का इस्तेमाल किया जा रहा है। डीजे बजाने पर हाईकोर्ट के प्रतिबंध का पट्टामुंडई इलाके में कोई असर नहीं होता है। ऐसा लगता है कि स्थानीय प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश को कागजों पर सीमित रखा है। कोई करबाई नेही करता हे । कई समारोह में डीजे हाई-भाइब्रेशन संगीत बजा रहे थे। लेकिन स्थानीय प्रशासन डीजे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसे लेकर पट्टामून्डाई इलाके में नाराजगी जताई गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता विभूति भूषण महापात्र ने पट्टामुंडई इलाके में डीजे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के लिए ओडिशा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। इस संबंध में हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को स्थानीय प्रशासन को पट्टामुंडई इलाके में डीजे और हाई-वाइब्रेशन संगीत पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। जिसे लेकर पिछली शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान सभी पूजा कमिटी ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए डीजे पूरी तरह से बंद कर दिए थे। लेकिन पिछले कुछ दिनों से पट्टामुंडई इलाके में अलग-अलग त्योहारों पर DJs तेज़ आवाज़ में म्यूज़िक बजाते देखे जा रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों में नाराज़गी उतार रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब त्योहार आते हैं, तो प्रशासन DJ पर बैन के लिए हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देता है। त्योहार खत्म होते ही प्रशासन DJ बैन को भूल जाता है। अभी हर जगह DJ बज रहे हैं। इस DJ बाज़ा की तेज़ आवाज़ आम लोगों को परेशान कर रही है। ग्रामीण इलाकों में DJ बजने वाले ज़्यादातर गाने अश्लील और गुमराह करने वाले होते हैं, इसलिए सभ्य समाज में इनकी कोई जगह नहीं होनी चाहिए। फिर भी ऐसे गाने बजाए जा रहे हैं। बुज़ुर्गों और घर पर इलाज करा रहे मरीज़ों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। DJ की तेज़ आवाज़ कई लोगों को अजीब स्थिति में डाल रही है। लेकिन स्थानीय पुलिस की इस तरह की बेरहम हरकत की लोगों ने कड़ी निंदा की है, और स्थानीय बुद्धिजीवियों में इस पर चर्चा हो रही है।
