कचरे से भरा है शहर , लोग बदबूदार माहौल में परेशान हैं

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 भुवनेश्वर 21/11 – पट्टामुंन्डाइ सहर को  सौंदर्यीकरण के नाम पर हो रहे तमाशे को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। हालांकि अलग-अलग कामों में पैसे की भारी हेराफेरी हो रही है, लेकिन अफसोस की बात है कि पौरपालिका इस पर ध्यान नहीं दे रही है। शहरी इलाका में जहां भी देखो, कचरा पड़ा है, और कई गंभीर समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि म्युनिसिपैलिटी के लिए स्वच्छ भारत मिशन सिर्फ एक नारा है, जबकि सफाई सिर्फ फाइलों में खाली जगह भरने में लगी हुई है।  यह घटना अब नगरो में चर्चा का विषय बन गई है।

युवा नेता सत्य प्रिय सामल, तपन साहू, अशोक लेंका का कहना है कि तहसील ऑफिस के सामने प्रस्तावित मल्टी-स्टोरेज मार्केट कॉम्प्लेक्स, यज्ञ मैदान और तहसील तलब के किनारे तरह-तरह के कचरे पड़ा हैं। इस स्थिति के बावजूद खुद तहसील और नगर परिषद प्रशासन इस समस्या को लेकर चुप है। कचरे और प्लास्टिक के कारण तहसील के सामने डंपिंग यार्ड जैसा दिखता है। कचरा और प्लास्टिक गए खा रहे हैं और तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं। तहसील ऑफिस के बगल से शहर के डेली मार्केट और राममंदिर की तरफ जाने का रास्ता है। हालांकि, यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग कामों के लिए आते हैं, लेकिन शिकायतें हैं कि इसके परिसर से निकलने वाले कचरे की बदबू के कारण लोग  बैठ नहीं पाते हैं। लोग लंबे समय से ऐसी स्थिति से जूझ रहे हैं, और समस्या जानने के बाद भी नगर परिषद  कचरा साफ नहिन कैराने लोगोने नाराजगी है। तहसील ऑफिस के तहसीलदार, एडिशनल तहसीलदार, चीफ क्लर्क और दूसरे कर्मचारियों के हर दिन यह हालत देखने के बाद भी सफाई को लेकर चुप रहने की घटना से इलाके के लोग परेशान हैं। दूसरी तरफ,

पट्टामुंडई तहसील ऑफिस की पुरानी बिल्डिंग भूतकोठी  बन गई है और वहां कई जानवर रह रहे हैं। पट्टामुंडई को म्युनिसिपल काउंसिल के तौर पर 37 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन यहां कई समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। शहरी सुंदरता के नाम पर प्लान बनाए जा रहे हैं और पैसा खर्च किया जा रहा है। लेकिन प्लान का इस्तेमाल लोगों के हित में नहीं हो रहा है। 2019 में शुरू हुआ करीब डेढ़ करोड़ रुपये का कचहरी तालाब का जीर्णोद्धार का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। शहर वालों को सही राहत नहीं दी जा रही है। मल्टी-स्टोरेज मार्केट कॉम्प्लेक्स और यज्ञ मैदान को अपग्रेड करने का काम तो दिया गया है, लेकिन उस पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। शहर की सफाई के लिए करोड़ों रुपये की लागत से ई-टॉयलेट बनाए गए थे, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया जा सका। इस वजह से, अलग-अलग कामों से आने वाले और दुकानों और बाजारों में काम करने वाले लोग इधर-उधर स्वछा कर रहे हैं, जिससे बदबूदार माहौल बन रहा है। हालांकि, इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन से आम तौर पर मांग की जा रही है कि पट्टामुंडई शहर में जमीन पर पड़े कचरे को उठाने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाए।

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